Saturday, January 17, 2026
Breaking News

अखलाक मॉब लिंचिंग केस में बड़ा अपडेट: कोर्ट ने केस वापसी की अर्जी खारिज की

अखलाक मॉब लिंचिंग केस में बड़ा अपडेट: लोअर कोर्ट ने यूपी सरकार की अर्जी खारिज की, अब रोजाना ट्रायल
उत्‍तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित बिसहड़ा (बिहारा) गांव में 10 साल पहले हुए बहुचर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग केस में एक बड़ा मोड़ आया है। लोअर कोर्ट ने यूपी सरकार की वह अर्जी खारिज कर दी है, जिसमें इस केस को वापस लेने का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि आरोपियों पर ट्रायल चलता रहेगा और अब रोजाना सुनवाई होने की संभावना है।
यह वही मामला है, जिसने 2015 में पूरे देश में बहस और आक्रोश पैदा कर दिया था।
💠 परिवार ने क्या कहा?
कोर्ट के फैसले के बाद मृतक अखलाक के भाई जान मोहम्मद ने कहा:
“हम मुसलमान जरूर हैं, लेकिन आज तक एक मुर्गी भी नहीं काटी।”
“10 साल से गांव नहीं गए… 10 साल से बकरी ईद नहीं मनाई।”
“फैसले से यह भरोसा बढ़ा है कि भारत में कानून का राज अभी भी कायम है।”
“हमें केस वापसी का दबाव भी झेलना पड़ा था।”
जान मोहम्मद ने बताया कि वह 2015 में गांव छोड़कर दादरी कस्बे में बस गए थे। सभी परिवारजन अलग-अलग जगह रह रहे हैं, क्योंकि गांव में सुरक्षा और दबाव की चिंता बनी रहती थी।
💠 घटना को फिर से समझिए – 28 सितंबर 2015
अफवाह फैली कि अखलाक के घर में फ्रिज में गौमांस रखा है।
भीड़ ने घर पर हमला किया और पिटाई में अखलाक की मौत हो गई।
FIR में 10 लोगों को नामजद किया गया और बाद में आरोपियों की संख्या बढ़कर 19 हुई।
एक आरोपी की 2016 में जेल में मौत भी हो चुकी है।
सभी आरोपी अभी जमानत पर हैं।
💠 केस क्यों फिर चर्चा में आया?
2025 में यूपी सरकार ने:
26 अगस्त 2025: केस वापस लेने का आदेश जारी किया
15 अक्टूबर 2025: CRPC धारा 321 में केस वापसी की अर्जी दाखिल
23 दिसंबर 2025: कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी
कोर्ट ने माना कि:
यह मामला समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध है
ट्रायल लगभग पूरा हो चुका है
ऐसे मामलों में सरकारी स्तर पर केस वापसी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है
💠 अब आगे क्या होगा?
कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि ट्रायल रोजाना चलेगा
गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है
अब अखलाक की पत्नी की गवाही कराई जाएगी
उनकी बेटी शाहिस्ता पहले ही बयान दे चुकी हैं
💠 5 महत्वपूर्ण सवाल – पाठकों के लिए
क्या 10 साल बाद भी न्याय की उम्मीद मजबूत रह सकती है?
क्या इस तरह के संवेदनशील मामलों में केस वापस लेने की कोशिश उचित थी?
क्या रोजाना सुनवाई तेज न्याय की ओर बड़ा कदम साबित होगी?
क्या इस केस का फैसला भविष्य के ऐसे मामलों को प्रभावित करेगा?
परिवार के बयान को आप किस नजर से देखते हैं?
💠 इस खबर से हमें क्या सीखना चाहिए?
न्याय में देरी हो सकती है, लेकिन प्रक्रिया कमजोर नहीं होती।
भीड़ का फैसला कभी अंतिम नहीं — कानून ही सर्वोपरि है।
अफवाहें समाज में बड़ा नुकसान कर सकती हैं।
संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रणाली का निष्पक्ष रहना बेहद जरूरी है।
सच सामने आने में समय लगता है — धैर्य और भरोसा जरूरी है।अदालत का यह निर्णय बताता है कि गंभीर मामलों में न्यायपालिका का हस्तक्षेप कितना महत्वपूर्ण होता है।
अफवाहों पर आधारित हिंसा समाज में दीर्घकालिक तनाव और अविश्वास पैदा करती है।
गवाहों की सुरक्षा पर कोर्ट का आदेश इस बात का संकेत है कि न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने के प्रति प्रतिबद्धता है।
ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और निष्पक्ष ट्रायल भविष्य में लोगों का सिस्टम पर भरोसा बढ़ाते हैं।
अदालतों में केसों की रोजाना सुनवाई सभी हाई-प्रोफाइल मामलों के लिए एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।
ये घटनाएं समाज में कानून-व्यवस्था और समुदायों के बीच संवाद की जरूरत को भी उजागर करती हैं।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका ऐसे मामलों में और ज्यादा जिम्मेदारी भरी हो जाती है।
यह केस आने वाली पीढ़ियों के लिए न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर विश्वास की एक सीख भी देता है।यह रिपोर्ट “Rashi Update” की ओर से प्रस्तुत है — जहां हम कोशिश करते हैं कि हर खबर को तथ्य, संतुलन और विश्वसनीयता के साथ आप तक पहुँचाया जाए। हमारा मकसद है कि आप तक तेज, सही और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *