ईरान में महंगाई के खिलाफ बगावत: 100 शहरों में प्रदर्शन, 45 मौतें, इंटरनेट बंद | Rashi Update
ईरान में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ जनआक्रोश अब सिर्फ प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर सरकार और जनता के बीच टकराव में बदल चुका है। पिछले 13 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने गुरुवार रात को और भयावह रूप ले लिया, जब देश के 100 से ज्यादा शहरों में सड़कें जाम कर दी गईं, आगजनी हुई और हिंसा भड़क उठी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि तेहरान एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा और पूरे देश में इंटरनेट व फोन सेवाएं ठप कर दी गईं। एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जबकि 2270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
महंगाई से भड़का गुस्सा
ईरान में आम लोगों की नाराजगी की जड़ें गहरी आर्थिक बदहाली में हैं। दिसंबर 2025 में ईरानी रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। साल की शुरुआत से ही रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में करीब 72 प्रतिशत और दवाओं की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके ऊपर सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62 प्रतिशत टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दीं। बेरोजगारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और आयात-निर्यात में बढ़ते घाटे ने हालात को विस्फोटक बना दिया।
रेजा पहलवी की वापसी की मांग
प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर नारे लगाए गए — “इस्लामिक रिपब्लिक का अंत” और “शाह पहलवी लौटेंगे”। प्रदर्शनकारी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के बेटे, क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग कर रहे हैं।
रेजा पहलवी को कई प्रदर्शनकारी एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। युवाओं का मानना है कि उनकी वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक संबंधों में सुधार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता मिल सकती है।
सरकार का सख्त रुख
तेहरान में बाजार बंद रहे, छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन लाइनें काट दीं। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि यह कदम हिंसक दमन की तैयारी का संकेत है। हालांकि, कुछ लोग अब भी सैटेलाइट इंटरनेट जैसे विकल्पों के जरिए वीडियो और जानकारी साझा कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही तो अमेरिका सख्त कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनाव बढ़ता दिख रहा है।
सरकार और प्रशासन से 5 बड़े सवाल
जब महंगाई लगातार बढ़ रही थी, तब सरकार ने समय रहते ठोस कदम क्यों नहीं उठाए?
अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, तो हालात इतने हिंसक कैसे हो गए?
इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद करना समाधान है या सच्चाई छिपाने की कोशिश?
पुलिसकर्मी की मौत के बाद क्या निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होगी?
क्या सरकार जनता की आवाज सुनेगी या हर विरोध को दबाने का रास्ता अपनाएगी?
हमें इस खबर से क्या सीख मिलती है?
महंगाई सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं होती, यह सरकार और जनता के रिश्ते को भी तोड़ देती है। जब संवाद खत्म होता है, तो सड़कों पर गुस्सा उतर आता है। इंटरनेट बंद करने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं, बल्कि अविश्वास और डर बढ़ता है।
ईरान की स्थिति यह दिखाती है कि अगर किसी भी देश में सरकार समय रहते जनता की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लेती, तो हालात कभी भी नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। महंगाई और बेरोजगारी हर शासन व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा होती हैं।
Rashi Update Note
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