यूपी में बीजेपी विधायक का वीडियो विवाद: कांग्रेस बोली—वोट लूटने की साजिश, विधायक ने बताया फर्जी एआई वीडियो
बीजेपी विधायक के कथित वीडियो से बढ़ी सियासी गर्मी
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में बल्दीरामपुर से बीजेपी विधायक रमेश चंद्र मिश्र का एक कथित वीडियो सामने आते ही राजनीति में हलचल तेज हो गई। वीडियो में वह कथित तौर पर कहते दिख रहे हैं कि—
“जो विपक्षी हैं उनका नाम कटवाइए… जो मृत हो गए हैं उनका नाम हटवाइए… इस अभियान में तेजी से लग जाइए।”
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
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कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया बड़ा आरोप
पूर्व कांग्रेस विधायक नदीम जावेद ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा—
यह लोकतंत्र और मताधिकार पर सीधा हमला है
भाजपा अब चुनाव जीतने के लिए वोट लूटने की रणनीति अपना रही है
राहुल गांधी के नेतृत्व में इसके खिलाफ जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा
उन्होंने इसे “लोकतांत्रिक पाप” बताते हुए कहा कि लड़ाई सिर्फ एसआईआर प्रक्रिया की नहीं बल्कि भारत की आत्मा और जनता के वोट की है।
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विधायक की सफाई — “वीडियो फर्जी, एआई से बनाया गया”
विवाद बढ़ता देख विधायक रमेश चंद्र मिश्र सामने आए और बयान दिया कि:
वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से एडिट किया गया है
उनकी बातों को काट-छांटकर गलत तरीके से पेश किया गया
उन्होंने केवल मृत वोटरों और डुप्लीकेट नाम हटाने की बात कही थी
विपक्षी इसे राजनीतिक रूप से भुना रहा है
विधायक ने यह भी बताया कि पिछले चुनाव में उनके क्षेत्र में 6200 नाम हटाए गए थे, जिसमें उनके कई समर्थकों के नाम “डुप्लीकेट” बताकर काटे गए थे। इसी संदर्भ में उन्होंने बूथ अध्यक्षों को सतर्क रहने को कहा था।
उन्होंने मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
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पहले भी बयानों पर हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब रमेश चंद्र मिश्र विवादों में आए हों।
लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने कहा था:
“अगर केंद्रीय नेतृत्व ने बड़े फैसले नहीं किए तो 2027 में यूपी में भाजपा की सरकार नहीं बनेगी।”
यह बयान भी वायरल हुआ था और बाद में उन्होंने कहा कि इसे तोड़-मरोड़कर दिखाया गया।
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क्या है एसआईआर (SIR) प्रक्रिया?
कई लोगों को वीडियो विवाद के बाद एसआईआर को लेकर भी भ्रम हुआ।
एसआईआर (Special Summary Revision) चुनाव आयोग की नियिमत प्रक्रिया है, जिसमें—
18+ नए वोटर जोड़े जाते हैं
मृतकों के नाम हटाए जाते हैं
दो जगह नाम होने पर उसे सही किया जाता है
पते या विवरण में गलतियाँ ठीक होती हैं
बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं
कहां शुरू हुआ?
पहला चरण बिहार में शुरू हुआ था।
फाइनल सूची में 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
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राजनीतिक असर क्या?
इस विवाद से यूपी में 2027 चुनाव से पहले एक नई बहस शुरू हो गई है:
क्या एआई तकनीक से राजनीतिक वीडियो का दुरुपयोग बढ़ रहा है?
क्या मतदाता सूची अपडेट को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है?
क्या इस तरह के विवाद चुनावी माहौल को प्रभावित करेंगे?
कांग्रेस इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है, जबकि बीजेपी इसे “फर्जी वीडियो” कहकर खारिज कर रही है।