इसरो ने 6100 किग्रा का अमेरिकी BlueBird-2 सैटेलाइट लॉन्च किया: स्मार्टफोन से सीधे 4G/5G कॉल की सुविधा शुरू
इसरो ने 6100 किग्रा का अमेरिकी BlueBird-2 सैटेलाइट लॉन्च किया: स्मार्टफोन से सीधे 4G/5G कॉल की सुविधा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को एक और बड़ा इतिहास रच दिया।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो ने LBM3-M6 रॉकेट के जरिए अमेरिकी BlueBird Block-2 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
यह भारत से लॉन्च किया गया सबसे भारी उपग्रह (6100 किग्रा) है, जो सीधे स्मार्टफोन तक ब्रॉडबैंड और सैटेलाइट कनेक्टिविटी पहुंचाएगा।
🌍 धरती के किसी भी कोने से Video Call संभव
BlueBird Block-2 एक नेक्स्ट-जेनरेशन कम्युनिकेशन सैटेलाइट है।
इसके जरिए अब किसी भी सामान्य स्मार्टफोन से:
4G/5G वॉइस कॉल
वीडियो कॉल
मैसेजिंग
इंटरनेट स्ट्रीमिंग
डेटा सेवाएं
पूरी दुनिया में कहीं से भी सीधा उपयोग की जा सकेगा।
🚀 भारत का सबसे भारी लॉन्च व्हीकल—“बाहुबली रॉकेट”
जिस रॉकेट से यह सैटेलाइट लॉन्च हुआ, वह LBM3 है—
कुल वजन: 640 टन
ऊंचाई: 43.5 मीटर
तीन-स्टेज रॉकेट
क्रायोजेनिक इंजन आधारित
दो शक्तिशाली सॉलिड बूस्टर
अपनी ताकत और प्रदर्शन के कारण इसे “बाहुबली रॉकेट” कहा जाता है।
इस रॉकेट ने इससे पहले:
चंद्रयान-2
चंद्रयान-3
OneWeb मिशन
जैसे महत्वपूर्ण अभियानों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।
🛰️ 15 मिनट बाद सैटेलाइट लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित
लॉन्च के लगभग 15 मिनट बाद, BlueBird-2 सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर लगभग 520 किमी ऊंचाई पर LEO (Low Earth Orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया।
यह मिशन NSIL (NewSpace India Limited) और AST SpaceMobile (USA) के बीच हुए कमर्शियल करार का हिस्सा है।
NSIL इसरो का कमर्शियल ब्रांच है।
🛰️ सबसे भारी पेलोड: 6100 किग्रा
BlueBird Block-2 भारत से अंतरिक्ष में भेजा गया:
सबसे भारी सैटेलाइट (6100 किग्रा)
सबसे भारी LEO मिशन
इससे पहले 4400 किग्रा COMS-03 सबसे भारी पेलोड था (नवंबर 2024)
यह लॉन्च इसरो की क्षमताओं को एक नए स्तर पर दिखाता है।
🌐 50+ मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी
AST SpaceMobile के अनुसार, उन्होंने दुनिया भर में 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है।
कंपनी का लक्ष्य है—
वैश्विक सेलुलर ब्रॉडबैंड
दूरदराज क्षेत्रों में कनेक्टिविटी
बिना नेटवर्क वाले इलाकों को नेटवर्क देना
सबसे बड़ी बात—
यूज़र्स को अपनी मोबाइल कंपनी बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि यह सेवा सीधे उनके स्मार्टफोन तक पहुंचेगी।
📡 कौन-कौन से सेक्टर होंगे लाभान्वित?
शिक्षा
स्वास्थ्य सेवाएं
आपातकालीन सहायता
सोशल नेटवर्किंग
दूरदराज गांव
समुद्री और पर्वतीय इलाकों में कनेक्टिविटी
यह तकनीक डिजिटल इंडिया को नई दिशा देगी।
📌 निष्कर्ष
इसरो का यह लॉन्च सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा तकनीकी कदम है।
6100 किग्रा BlueBird-2 को लॉन्च कर इसरो ने साबित कर दिया है कि वह दुनिया के सबसे भारी पेलोड मिशन भी आसानी से संभाल सकता है।
यह मिशन भविष्य की मोबाइल कनेक्टिविटी को बिल्कुल