सोमवार, दिसम्बर 1, 2025
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मायावती बोलीं— अच्छे दिन हम लाएंगे, ओबीसी संग बड़ी बैठक में नई रणनीति

ओबीसी नेताओं संग बड़ी बैठक— मायावती बोलीं: “अच्छे दिन हम लाएंगे, सवर्ण खुद हमारे पास आएंगे”

बसपा सुप्रीमो मायावती पूरी तरह एक्शन मोड में हैं। लगातार बैठकों और समीक्षा बैठकों के बीच शनिवार को उन्होंने ओबीसी नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक की, जिसमें 250 से अधिक पदाधिकारी मौजूद रहे। यह एक महीने में मायावती का पांचवां बड़ा कार्यक्रम बताया जा रहा है।

ओबीसी समाज को जोड़ने, वोटर लिस्ट की समीक्षा और 2025 रणनीति पर इस बैठक में व्यापक चर्चा हुई।




⭐ “अच्छे दिन हम लाएंगे, मगर सत्ता की चाबी चाहिए” — मायावती

बैठक में मायावती ने कहा—

> “बसपा सत्ता में आएगी तो अच्छे दिन आएंगे। इसके लिए ओबीसी समाज को जल्दी से जल्दी बसपा के साथ मजबूती से जुड़ना होगा।”



उन्होंने कहा कि
✔ ओबीसी बहुजन समाज की रीढ़ हैं
✔ बसपा की सरकारों ने इनके लिए सबसे ज्यादा काम किया
✔ अन्य पार्टियां सिर्फ जुमलेबाजी करती हैं




⭐ सवर्ण समाज पर बड़ा बयान— “यह समाज खुद आ जाएगा”

मायावती ने कहा—

> “उच्चवर्ग (सवर्ण) समाज आज राजनीतिक रूप से जागरूक है। इन्हें जोड़ने के लिए अलग भाईचारा संगठन बनाने की जरूरत नहीं है। ये खुद पार्टी से जुड़ आएंगे।”



उन्होंने कहा कि सपा और BJP की राजनीति जातिवादी है, जबकि बसपा का लक्ष्य सर्वसमाज को जोड़ना है।




⭐ ओबीसी भाईचारा संगठन को एक्टिव होने का निर्देश

बैठक में उन्होंने ओबीसी भाईचारा संगठन से कहा—

जमीनी गतिविधियां तेज करें

ओबीसी समाज की हर जाति को बसपा से जोड़ें

बिखरी जातियों को एक मंच पर लाएं

अलग-अलग छोटी पार्टियां बनाना एकता को कमजोर करता है


उन्होंने कहा—

> “जातियों की बिखरावट का फायदा हमेशा जातिवादी पार्टियां उठाती रही हैं।”






⭐ मतदाता सूची से नाम नहीं कटने देना— मायावती की सख्त चेतावनी

बैठक में चल रहे SIR (Special Revision of Voter List) पर भी बातचीत की गई।

मायावती ने निर्देश दिया—

बसपा वोटर्स का नाम किसी हाल में कटने न पाए

चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का पालन हो

हर जिले में संगठन सक्रिय रहे





⭐ दो दिन पहले मुस्लिम नेताओं की बैठक— मायावती का बड़ा संदेश

मायावती ने 48 घंटे पहले मुस्लिम नेताओं के साथ मीटिंग कर
कहा था—

> “भाजपा को हराना है तो सपा को नहीं, बसपा को वोट दीजिए।”



मायावती का नया अभियान
✔ मुस्लिम
✔ ओबीसी
✔ दलित
को एकजुट कर 2025 चुनाव में अपनी वापसी का है।




⭐ BAMCEF को लेकर फैली भ्रांतियों पर सफाई

मायावती ने कहा—

> “BAMCEF कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे कर्मचारियों का सामाजिक संगठन है।
कांशीराम ने इसकी स्थापना की थी। यह BSF परिवार से जुड़ा संगठन है।”



उन्होंने इस संगठन को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाओं को दूर करने को कहा।




⭐ आकाश आनंद और सतीश चंद्र मिश्रा क्यों नहीं उपस्थित?

आकाश आनंद — बिहार चुनाव व्यस्तता

सतीश चंद्र मिश्रा — निजी कारण


हालांकि दोनों नेताओं की गैर-मौजूदगी चर्चा में रही।




⭐ बैठक के प्रमुख निष्कर्ष

1. ओबीसी को तेजी से बसपा से जोड़ना


2. मतदाता सूची से वोट न कटने देना


3. सवर्ण समाज खुद जुड़ आएगा— अलग अभियान की जरूरत नहीं


4. जातिवाद करने वाली पार्टियों को जवाब


5. ग्राउंड एक्टिविटी तेज करना






📢 अंत में…

मायावती लगातार बैठकों के जरिए 2025 चुनाव के लिए बड़ा गठजोड़ तैयार करने में जुटी हैं।
उनकी रणनीति साफ है—
✔ मुस्लिम + ओबीसी + दलित का मजबूत विकल्प बनाना
✔ भाजपा और सपा को चुनौती देना

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