Saturday, January 17, 2026
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पंकज चौधरी बने यूपी बीजेपी अध्यक्ष: बेटे की कामयाबी पर भावुक हुई मां, परिवार की राजनीति की विरासत हुई मजबूत

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक भावुक और ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाए जाने की पुष्टि हुई। खबर मिलते ही गोरखपुर स्थित उनके आवास पर जश्न का माहौल बन गया। कार्यकर्ताओं, समर्थकों और परिवार के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी, लेकिन सबसे ज्यादा भावुक नजर आईं उनकी मां उज्ज्वला चौधरी।

मां की आंखों में गर्व और दर्दबेटे की इस बड़ी कामयाबी पर उज्ज्वला चौधरी खुद को रोक नहीं पाईं। उन्होंने अपने दिवंगत बड़े बेटे प्रदीप चौधरी को याद करते हुए कहा कि वही पंकज चौधरी को राजनीति में लेकर आए थे। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।एक मां के लिए यह पल गर्व के साथ-साथ दर्द भी लेकर आया—एक बेटे की सफलता और दूसरे बेटे की यादें।राजनीति परिवार के संस्कारों मेंपंकज चौधरी का परिवार राजनीति से लंबे समय से जुड़ा रहा है।मां उज्ज्वला चौधरी महाराजगंज से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं।बड़े भाई प्रदीप चौधरी भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे, जिनका बीमारी के चलते निधन हो गया।बहन साधना चौधरी सिद्धार्थनगर से जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं।परिवार की अन्य सदस्य नीलम चौधरी और सपना चौधरी भी सामाजिक रूप से सक्रिय हैं।यह साफ दिखाता है कि राजनीति इस परिवार की विरासत रही है।जिम्मेदारी का बड़ा इम्तिहानयूपी बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी बेहद अहम मानी जाती है। पंकज चौधरी के सामने अब कई बड़ी चुनौतियां हैं—संगठन को मजबूत करनाकार्यकर्ताओं में संतुलन बनानाआगामी चुनावों की रणनीति तय करनामां उज्ज्वला चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनका बेटा इस पद की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएगा।परिवार और मोहल्ले में खुशीपंकज चौधरी की पोती कायना, जो दूसरी कक्षा में पढ़ती हैं, ने मासूमियत से कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।वहीं मोहल्ले के लोगों ने बताया कि आधिकारिक घोषणा के बाद गाजे-बाजे के साथ जोरदार स्वागत किया जाएगा। पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।आगे की राहएक तरफ सत्ता और संगठन की बड़ी जिम्मेदारी, दूसरी तरफ मां की उम्मीदें और परिवार की राजनीतिक विरासत—अब सबकी नजर इस बात पर है कि पंकज चौधरी इस विश्वास पर कितने खरे उतरते हैं।—📌 सवाल जो उठते हैंक्या पंकज चौधरी यूपी बीजेपी को नई दिशा दे पाएंगे?क्या पारिवारिक राजनीतिक अनुभव उनके काम आएगा?संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?क्या आने वाले समय में बड़े संगठनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे?—🧠 इस खबर से क्या सीख मिलती है?सफलता के पीछे परिवार का त्याग और संस्कार होते हैं।राजनीति सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है।मां का आशीर्वाद किसी भी नेता के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा होता है।भावनाओं और नेतृत्व को साथ लेकर चलना ही सच्ची राजनीति है।

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