सोमवार, दिसम्बर 1, 2025
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यूपी चुनाव 2027: अखिलेश 340 सीटों पर लड़ने को तैयार, कांग्रेस को सिर्फ 50–60 सीटें! क्या वाकई यूपी में कांग्रेस इतनी कमजोर है?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का राजनीतिक माहौल गर्म हो चुका है। सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच तनातनी साफ दिखाई दे रही है। बिहार चुनाव में कांग्रेस की करारी हार ने अब यूपी में उसके ‘मोलभाव’ की क्षमता पर बड़ा असर डाला है।




🔻 सपा 340 सीटों पर क्यों लड़ना चाहती है?

सपा के एक बड़े नेता के अनुसार पार्टी इस बार यूपी की 403 में से 340 सीटों पर सीधे चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। यानी सहयोगियों के लिए सिर्फ 50–60 सीटें ही छोड़ी जाएंगी।

इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

1️⃣ 2022 का समीकरण

2022 में सपा ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था। तब सहयोगियों को इस तरह सीटें मिलीं—

RLD: 33

SBSP: 17

अपना दल (कमेरावादी): 5

महान दल: 2

शिवपाल सिंह यादव की पार्टी: 1

अन्य छोटी पार्टियां: 2


अब शिवपाल की पार्टी सपा में विलय हो चुकी है। इस गणित के हिसाब से सपा को लगता है कि 50–60 सीटें ही सहयोगियों के लिए पर्याप्त हैं।

2️⃣ जमीनी हकीकत का फॉर्मूला

अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि सीटें “जमीनी मजबूती” के आधार पर ही मिलेंगी। बिहार चुनाव के बाद सपा अधिक जोखिम लेने मूड में नहीं है।




🔻 कांग्रेस को क्यों सिर्फ 50–60 सीटों की सीमा?

कांग्रेस यूपी के सभी 75 जिलों में दावेदारी चाहती है। वह 100–125 सीटों पर लड़ने की बात कर रही है, पर सपा इसे अव्यवहारिक मानती है क्योंकि—

1️⃣ कांग्रेस का पिछला प्रदर्शन बेहद कमजोर

2022 विधानसभा चुनाव:

लड़ी: 399 सीटें

जीती: सिर्फ 2 सीटें

वोट शेयर: 2.33%


2024 लोकसभा चुनाव (सपा गठबंधन में):

कांग्रेस ने 17 सीटों पर लड़ा

जीती: 6

विधानसभा सेगमेंट में बढ़त: 85 में से 39
हालांकि इनमें कई सीटें वर्तमान में सपा विधायकों के कब्जे में हैं, इसलिए सपा इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है।


2️⃣ अमेठी–रायबरेली की दिक्कत

कांग्रेस यहां सभी 10 विधानसभा सीटें चाहती है, पर इनमें कई पर सपा के विधायक हैं—इसलिए सपा इसे मानने को तैयार नहीं।




🔻 2017 वाला दौर अब क्यों लागू नहीं?

2017 में सपा ने कांग्रेस को 100 सीटें दी थीं।
पर तब भी कांग्रेस सिर्फ 7 सीटें जीत पाई थी और 44 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी।
उसका वोट शेयर तब भी सिर्फ 6.25% था।

यही वजह है कि इस बार सपा कांग्रेस की “ऐतिहासिक कमजोरी” को आधार बना रही है।




🔻 बिहार चुनाव 2025 ने कांग्रेस की स्थिति और कमजोर की

बिहार में महागठबंधन की हार ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है।

कांग्रेस 61 सीटों पर लड़ी

जीती सिर्फ 6 सीटें

स्ट्राइक रेट मात्र 10%


एमवाई वोट बैंक में भी गिरावट देखी गई—

यादव समर्थन: 84% से घटकर 74%

मुस्लिम समर्थन: 76% से गिरकर 69%


ओवैसी की पार्टी के प्रभाव से मुस्लिम वोट बिखरे, और यादवों में जातिगत झुकाव बढ़ा।

सपा अब यूपी में वही गलती दोहराने से बचना चाहती है।




🔻 यूपी में महागठबंधन के लिए 2027 की राह क्यों कठिन?

1️⃣ बसपा का वोट बैंक फिर एक्टिव

मायावती की सक्रियता बढ़ने के बाद दलित वोटरों का बसपा से बाहर जाना मुश्किल हो गया है।

2️⃣ ओवैसी की पार्टी का संभावित असर

यदि AIMIM यूपी में मजबूती से उतरी तो मुस्लिम वोट बैंक बिखर सकता है।

3️⃣ पिछड़ों पर BJP की पकड़

निषाद पार्टी, सुभासपा और अपना दल के कारण भाजपा का पिछड़ा समीकरण मजबूत है।




🔻 कांग्रेस का नया प्लान: गांव-गांव चौपाल

कांग्रेस 26 नवंबर से संविधान चौपाल और पिछड़े वर्ग पहुंच अभियान शुरू कर रही है।
पर इसका असर कितना होगा, यह आगामी MLC चुनावों के नतीजों से साफ हो जाएगा।




📌 निष्कर्ष

सपा अपनी जमीनी मजबूती और कांग्रेस की कमजोर स्थिति के कारण 340 सीटों पर खुद लड़ना चाहती है।

कांग्रेस पूरे यूपी में पकड़ दिखाना चाहती है, पर वास्तविकता यह है कि उसका वोट बैंक 2–6% तक सीमित होकर रह गया है।

बिहार चुनाव के परिणामों ने कांग्रेस की मोलभाव क्षमता को और कम कर दिया है।

महागठबंधन के सामने BJP और उसके NDA ब्लॉक की चुनौती जोरदार है।

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