USCIRF रिपोर्ट पर संत समाज का हमला: राम मंदिर, बाबरी मस्जिद विवाद और भारत की छवि पर ‘नैरेटिव युद्ध’
USCIRF की रिपोर्ट पर भारत में घमासान: राम मंदिर और बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा विवाद
अमेरिका की यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने 2025 की वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए राम मंदिर, बाबरी मस्जिद, पीएम नरेंद्र मोदी और आरएसएस से जुड़े कई मुद्दों को उठाया है। रिपोर्ट ने भारत की धार्मिक नीतियों पर सवाल खड़े किए, जिसके बाद संत समाज से लेकर कानूनी विशेषज्ञों तक ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया?
USCIRF ने 1992 की बाबरी मस्जिद ढहाने से लेकर 2024 में राम मंदिर उद्घाटन तक की घटनाओं का उल्लेख किया। रिपोर्ट में कहा गया कि—
1992 में 16वीं सदी की मस्जिद को भीड़ ने तोड़ा
घटना के बाद 2000 से ज्यादा लोग दंगे में मारे गए
2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के आधार पर विवादित जमीन ट्रस्ट को सौंपी गई
2024 में ‘बाबरी मस्जिद के खंडहरों पर राम मंदिर उद्घाटन’ हुआ
USCIRF ने इसे “धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा” बताया, जबकि भारत इसे “पूरी न्यायिक प्रक्रिया के बाद निपटी हुई ऐतिहासिक घटना” मानता है।
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RSS पर आरोप — किताबें बदलने से लेकर धर्मांतरण कानून तक
रिपोर्ट में दावा किया गया कि:
आरएसएस स्कूल की किताबों से ‘मुस्लिम शासकों का इतिहास हटाने’ का एजेंडा चला रहा है
12 राज्यों में एंटी-कन्वर्ज़न कानूनों को और कड़ा किया गया
चुनावों से पहले मुसलमानों के खिलाफ ‘नफरती भाषण’ दिए गए
रिपोर्ट ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर भी सवाल उठाए।
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संत समाज की कड़ी नाराजगी — “यह भारत की संप्रभुता का अपमान”
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने USCIRF की रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा—
यह रिपोर्ट भारत की समावेशी सांस्कृतिक विरासत का अपमान है
राम मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट के सर्वसम्मत फैसले से बना
विदेशी एजेंसियां भारत को अस्थिर दिखाने का ‘नैरेटिव युद्ध’ चला रही हैं
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका की एजेंसियां भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही हैं।
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“दूसरे देशों के अत्याचारों पर चुप क्यों?” — संत समिति का सवाल
स्वामी जितेंद्रानंद ने पूछा—
पाकिस्तान में हिंदू 8% से घटकर 1% क्यों रह गए?
बांग्लादेश में हिंदू आबादी 16% से 7.5% कैसे हुई?
अफगानिस्तान में सिर्फ 1 हिंदू कैसे बचा?
फिजी में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों पर चुप्पी क्यों?
उन्होंने कहा कि USCIRF कभी इन मामलों पर रिपोर्ट जारी नहीं करता, जिससे उनकी नीयत पर सवाल उठते हैं।
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विष्णु शंकर जैन का बयान — “यह नैरेटिव युद्ध है”
राम मंदिर-भूमि मामले में शामिल रहे एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा—
रिपोर्ट तथ्यहीन और पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है
मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाई गईं, लेकिन मंदिरों के प्रमाण मौजूद हैं
रिपोर्ट देश में तनाव बढ़ाने की कोशिश है
USCIRF को भारत की न्याय व्यवस्था की कोई समझ नहीं है
उन्होंने इसे “साफ-साफ नैरेटिव वॉर” बताया।
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9–10 दिसंबर को संतों की राष्ट्रीय बैठक
अखिल भारतीय संत समिति ने 9–10 दिसंबर 2025 को संतों की बड़ी बैठक बुलाई है। इसमें USCIRF जैसी विदेशी एजेंसियों को लेकर भविष्य की रणनीति तय की जाएगी। समिति ने कहा—
“अगर अमेरिका की एजेंसियों ने हस्तक्षेप बंद नहीं किया तो भारत को भी अपने संबंधों पर पुनर्विचार करना होगा।”
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निष्कर्ष — रिपोर्ट ने बढ़ाया भू-राजनीतिक तनाव
USCIRF की रिपोर्ट ने एक बार फिर धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर भारत की राजनीतिक-सामाजिक संरचना पर सवाल उठाए हैं।
भारत के धार्मिक नेताओं, संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि—
यह रिपोर्ट भारत की संप्रभुता और सामाजिक संरचना पर सीधा हमला है।